जनवरी 2026 से OPS वापसी को लेकर बड़ा फैसला, कर्मचारियों में उम्मीद Old Pension Scheme

Old Pension Scheme – जनवरी 2026 से पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme – OPS) की संभावित वापसी को लेकर देशभर के सरकारी कर्मचारियों में नई उम्मीद जगी है। लंबे समय से कर्मचारी संगठन OPS की बहाली की मांग कर रहे हैं, क्योंकि नई पेंशन योजना (NPS) में सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित आय की गारंटी नहीं मिलती। OPS के तहत कर्मचारियों को अंतिम वेतन के आधार पर आजीवन पेंशन मिलती है, जिससे बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा बनी रहती है। हाल के महीनों में कई राज्यों द्वारा OPS को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए हैं, जिसके बाद केंद्र स्तर पर भी इस मुद्दे पर गंभीर विचार होने की चर्चा है। जनवरी 2026 की समयसीमा इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि यह अगले वेतन आयोग और नीतिगत बदलावों से भी जुड़ी हो सकती है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस फैसला लेगी और पेंशन व्यवस्था को फिर से भरोसेमंद बनाएगी।

Old Pension Scheme
Old Pension Scheme

OPS और NPS के बीच अंतर पर फिर शुरू हुई बहस

OPS और NPS के बीच अंतर को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। पुरानी पेंशन योजना में सरकार पूरी पेंशन की जिम्मेदारी लेती थी और सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को महंगाई भत्ते के साथ नियमित पेंशन मिलती थी। वहीं NPS बाजार आधारित प्रणाली है, जिसमें पेंशन की राशि निवेश के प्रदर्शन पर निर्भर करती है। कर्मचारियों का कहना है कि बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम बुढ़ापे में उठाना व्यावहारिक नहीं है। इसी कारण OPS को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत मॉडल माना जाता रहा है। जनवरी 2026 से OPS वापसी की खबरों ने इस बहस को और तेज कर दिया है। कर्मचारी संगठन लगातार यह तर्क दे रहे हैं कि सरकार को राजकोषीय संतुलन के साथ-साथ कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।

कर्मचारी संगठनों की भूमिका और दबाव

OPS की वापसी को लेकर कर्मचारी संगठनों की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में देशभर में कई बार धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन के जरिए कर्मचारियों ने अपनी मांग सरकार के सामने रखी है। संगठनों का कहना है कि सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश की सेवा में लगाया है, इसलिए सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें सुरक्षित और स्थिर पेंशन मिलना उनका अधिकार है। जनवरी 2026 को लक्ष्य मानकर संगठन रणनीति बना रहे हैं और सरकार पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं। उनका मानना है कि यदि समय रहते फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज हो सकते हैं।

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राज्यों के फैसलों से बढ़ी उम्मीद

कुछ राज्यों द्वारा OPS को फिर से लागू करने के फैसलों ने कर्मचारियों की उम्मीदों को और मजबूत किया है। इन राज्यों में कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलने लगा है, जिससे अन्य राज्यों और केंद्र सरकार पर भी नैतिक दबाव बढ़ा है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि जब राज्य स्तर पर OPS संभव है, तो केंद्र स्तर पर भी इसका रास्ता निकाला जा सकता है। जनवरी 2026 से पहले इन राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाई जा सकती है।

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जनवरी 2026 क्यों है निर्णायक समय

जनवरी 2026 को निर्णायक इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसी अवधि में कई बड़े प्रशासनिक और आर्थिक फैसले अपेक्षित हैं। नए वेतन आयोग की संभावनाएं, महंगाई भत्ते में बदलाव और पेंशन सुधार जैसे मुद्दे इसी समयरेखा से जुड़े हुए हैं। OPS की वापसी पर फैसला इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया जा सकता है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार इस मौके पर एक व्यापक और दूरदर्शी निर्णय लेगी।

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Author: Ruth Moore

Ruth MOORE is a dedicated news content writer covering global economies, with a sharp focus on government updates, financial aid programs, pension schemes, and cost-of-living relief. She translates complex policy and budget changes into clear, actionable insights—whether it’s breaking welfare news, superannuation shifts, or new household support measures. Ruth’s reporting blends accuracy with accessibility, helping readers stay informed, prepared, and confident about their financial decisions in a fast-moving economy.

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