खरीदने पर काला, जलाने पर लाल, फेंकने पर सफेद – बताओ क्या? Hindi Paheliyan

Hindi Paheliyan – “खरीदने पर काला, जलाने पर लाल, फेंकने पर सफेद – बताओ क्या?” यह प्रसिद्ध हिंदी पहेली सुनते ही दिमाग में जिज्ञासा पैदा हो जाती है। ऐसी पहेलियाँ केवल मनोरंजन का साधन नहीं होतीं, बल्कि सोचने-समझने की क्षमता को भी तेज करती हैं। हिंदी पहेलियाँ शब्दों के खेल, तर्क और अनुभव पर आधारित होती हैं, जिनका उत्तर अक्सर हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़ा होता है। इस पहेली में रंगों का प्रयोग बेहद चतुराई से किया गया है, जो अलग-अलग परिस्थितियों में वस्तु के बदलते रूप को दर्शाता है। पहली नज़र में यह सवाल कठिन लगता है, लेकिन जब हम इसके संकेतों पर ध्यान देते हैं, तो जवाब धीरे-धीरे स्पष्ट होने लगता है। बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर उम्र के लोगों को ऐसी पहेलियाँ पसंद आती हैं क्योंकि ये ज्ञान के साथ-साथ मज़ा भी देती हैं। यही कारण है कि हिंदी पहेलियाँ आज भी लोककथाओं, किताबों और सोशल मीडिया पर खूब लोकप्रिय हैं।

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पहेली का संकेत और उसका अर्थ

इस पहेली के तीन मुख्य संकेत हैं – खरीदने पर काला, जलाने पर लाल और फेंकने पर सफेद। हर संकेत अपने आप में एक कहानी कहता है। जब कोई वस्तु खरीदी जाती है और वह काली दिखाई देती है, तो इसका मतलब है कि उसका प्राकृतिक रूप गहरे रंग का है। जलाने पर लाल होना इस ओर इशारा करता है कि आग के संपर्क में आने पर वह वस्तु तपती है और लाल रंग की चमक देने लगती है। वहीं फेंकने पर सफेद होना यह बताता है कि उपयोग के बाद उसका रूप पूरी तरह बदल जाता है। इन तीनों अवस्थाओं को एक साथ जोड़ने पर हमें ऐसी चीज़ की तलाश करनी होती है, जो इन सभी स्थितियों में अलग-अलग रंग दिखाए। यही विश्लेषण पहेली को हल करने की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है।

सही उत्तर तक पहुँचने की प्रक्रिया

जब हम इन संकेतों को ध्यान से समझते हैं, तो कई संभावनाएँ दिमाग में आती हैं, लेकिन सही उत्तर वही होगा जो तीनों शर्तों पर खरा उतरे। “खरीदने पर काला” हमें उस वस्तु की ओर ले जाता है जो बाज़ार में काले रंग में मिलती है। “जलाने पर लाल” से साफ होता है कि वह वस्तु जलने पर अंगारों की तरह लाल हो जाती है। “फेंकने पर सफेद” का मतलब है कि जलने के बाद जो बचता है, वह सफेद रंग का होता है। इन तीनों अवस्थाओं को जोड़ने पर उत्तर बनता है – कोयला।

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हिंदी पहेलियों का महत्व

हिंदी पहेलियाँ हमारी भाषा और संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। ये न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि मानसिक विकास में भी सहायक होती हैं। ऐसी पहेलियाँ बच्चों को सोचने, तुलना करने और निष्कर्ष निकालने की आदत सिखाती हैं। बड़ों के लिए ये याददाश्त और तर्कशक्ति को मज़बूत रखने का अच्छा साधन हैं। लोक परंपराओं में पहेलियों का उपयोग ज्ञान बाँटने और बातचीत को रोचक बनाने के लिए किया जाता रहा है।

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ऐसी पहेलियाँ क्यों पसंद की जाती हैं

इस तरह की पहेलियाँ इसलिए लोकप्रिय हैं क्योंकि इनमें उत्तर छिपा हुआ होता है, जिसे ढूँढने में मज़ा आता है। रंग, रूप और परिस्थितियों के बदलाव के ज़रिये दिमाग को चुनौती दी जाती है। जब सही उत्तर सामने आता है, तो संतोष की भावना होती है। साथ ही, ये पहेलियाँ समूह में पूछने पर चर्चा और हँसी-मज़ाक का माहौल बना देती हैं। परिवार या दोस्तों के बीच ऐसी पहेलियाँ ज्ञानवर्धक खेल का रूप ले लेती हैं।

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Author: Ruth Moore

Ruth MOORE is a dedicated news content writer covering global economies, with a sharp focus on government updates, financial aid programs, pension schemes, and cost-of-living relief. She translates complex policy and budget changes into clear, actionable insights—whether it’s breaking welfare news, superannuation shifts, or new household support measures. Ruth’s reporting blends accuracy with accessibility, helping readers stay informed, prepared, and confident about their financial decisions in a fast-moving economy.

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